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दो जेबकतरों की बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई।
पहला जेबकतरा दूसरे से बोला, “अरे सुना है तेरी बेटी की शादी हो गई, मगर मुझे तो बुलाया भी नहीं!”
शर्माते हुए दूसरा जेबकतरा बोला, “अरे गुरु! मत पूछो... अचानक एक बढ़िया दामाद मिल गया, जल्दी-जल्दी शादी करनी पड़ी।”
पहला बोला, “अच्छा! तो क्या दिया दहेज में?”
दूसरा मुस्कुराकर बोला, “कुछ नकद नहीं देना पड़ा... बस 45 नंबर बस का रूट दामाद को दे दिया!”